मार्च 20, 2011

प्रेम पत्र

प्रेत  आएगा
किताब से निकाल ले जाएगा प्रेम पत्र
गिद्ध उसे पहाड़ पर नोच-नोच खाएगा

चोर आएगा तो प्रेम पत्र चुराएगा
जुआरी प्रेम पत्र पर ही दांव लगाएगा
ऋषि आएंगे तो दान में मागेंगे प्रेम पत्र

बारिश आएगी तो
प्रेम पत्र ही गलाएगी
आग आएगी तो जलाएगी प्रेम पत्र
बन्दिशें प्रेम पत्र पर ही लगाई जाएंगी

साँप आएगा तो डँसेगा प्रेम पत्र
झींगुर आएंगे तो चाटेंगे प्रेम पत्र
कीड़े प्रेम पत्र ही काटेंगे

प्रलय के दिनों में
सप्तर्षि, मछली और मनु
सब वेद बचाएंगे
कोई नहीं बचाएगा प्रेम पत्र

कोई रोम बचाएगा
कोई मदीना
कोई चाँदी बचाएगा, कोई सोना
मैं निपट अकेला
कैसे बचाऊंगा तुम्हारा प्रेम पत्र ।              
                                                ................. बद्रीनारायण  

सितंबर 20, 2010

कमल के फूल

फूल लाया हूँ कमल के ।
क्या करूँ इनका ?
पसारें आप आँचल,
छोड़ दूँ,
हो जाए जी हल्का !

किन्तु क्या होगा कमल के फूल का ?

कुछ नहीं होता
किसी की भूल का-
मेरी कि तेरी हो-
ये कमल के फूल केवल भूल हैं ।

भूल से आँचल भरूँ ना
गोद में इनके सम्हाले
मैं वजन इनके मरूँ ना ।

ये कमल के फूल
लेकिन मानसर के हैं,
इन्हें हूँ बीच से लाया
ना समझो तरी पर के हैं ।

भूल भी यदि है
अछूती भूल है ?
मानसर वाले
कमल के फूल हैं । .........भवानीप्रसाद मिश्र

जुलाई 27, 2010

सावन घन प्राणों में बरसे

सावन आ गया, आया ही नहीं इसका आना दिख भी रहा है, पूरे आषाढ़ बादल रुठे रहे, आते थे पर बरसने को उनकी इच्छा ही नहीं होती थी । अब सावन में पहले ही दिन से घेरे हैं, धरती की प्यास देर से ही सही तृप्त कर रहे हैं ।

सावन पर निराला की दो रचनाएँ -


(1)
प्यासे तुमसे भरकर हरसे ।
सावन घन प्राणों में  बरसे ।

उनयी आँखों में श्याम घटा,
विद्युत की नस-नस नई छटा,

फैली हरियाली अटा-अटा
अंगों के रंगों के परसे ।

अविरत रिमझिम वीणा द्रिमद्रिम;
प्रति छन रेलती पवन पश्चिम
मृदंग वादन, गति अविकृत्रिम
जी के भीतर से, बाहर से ।

(2)

धिक मद, गरजे बदरवा,
चमकि बिजुली डरपावे,
सुहावे सघन झर, नरवा
         कगरवा कगरवा ।

जून 18, 2010

कल्पना वाला बच्चा

शबीह की एक कविता पिछले पोस्ट में दी गई थी, यहाँ उनकी एक दूसरी कविता पढ़िए ।


गुलाब की सेज पर
लेटा, वो बच्चा !
रूई-से बिस्तर पर
सोया, वो बच्चा !

वो बच्चा,
जिसका भोलेपन भरा चेहरा,
प्यार भरी आँखें,
रस भरे होंठ,
किलकारियों भरी आवाज़,
लाल-लाल गाल,
छोटे-छोटे हाथ और पैर
जिसको छूने का मन चाहे,
थामने को दिल चाहे ।

'प्यार करने को कोई ऐसा होता
तो कल्पना सच हो जाती।'